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EXCLUSIVE: जिस स्कूल ने UP बोर्ड रिजल्ट में दिए दो-दो स्टेट टॉपर, उसकी सफलता का 'सुपर 30' है राज; जानिए प्रिंसिपल ने क्या-क्या बताया

 Edited By: Vinay Trivedi
 Published : Apr 24, 2026 03:33 pm IST,  Updated : Apr 24, 2026 04:04 pm IST

UP Board Result 2026: यूपी बोर्ड के रिजल्ट में एक ही स्कूल ने दो-दो स्टेट टॉपर देकर कीर्तिमान स्थापित किया। इस स्कूल में बच्चों को किस खास तरीके से पढ़ाया जाता है, उन्हें बोर्ड परीक्षा के लिए कैसे तैयार किया जाता है, इसे जानने के लिए INDIA TV ने स्कूल के प्रिंसिपल से एक्सक्लूसिव बातचीत की।

up board result 2026- India TV Hindi
एक साथ दो-दो टॉपर देने वाले स्कूल की सफलता की कहानी पढ़िए। Image Source : REPORTERS INPUT

UP Board के रिजल्ट में इस बार सीतापुर के एक स्कूल ने रिकॉर्ड बना दिया, जिसमें उसने एक साथ दो-दो स्टेट टॉपर दिए। सीतापुर के बाबूराम सावित्री देवी इंटर कॉलेज की स्टूडेंट कशिश वर्मा ने 10वीं और शिखा वर्मा ने 12वीं की परीक्षा में पूरे यूपी में टॉप कर कीर्तिमान स्थापित किया। खास बात ये भी है कि ये दोनों होनहार स्टूडेंट स्कूल के उस निशुल्क 'सुपर 30' बैच से हैं, जहां मेधावी छात्रों को मुफ्त में शिक्षा देकर पढ़ाया जाता है। सफलता के इसी मूलमंत्र और स्कूल की स्ट्रैटेजी को समझने के लिए INDIA TV ने स्कूल के प्रिंसिपल अरुण कुमार वर्मा के साथ Exclusive बातचीत की, जिसमें उन्होंने स्कूल के खास टीचिंग मैथड के बारे में बताया।

सवाल- यूपी के एक ही जिले और एक ही स्कूल से दो-दो स्टेट टॉपर! जब आपको यह खबर मिली, तो आपकी पहली प्रतिक्रिया क्या थी?

जवाब- प्रिंसिपल अरुण कुमार वर्मा ने कहा, 'जब हमने टीवी पर हाईस्कूल के बच्चे के टॉप करने की खबर देखी, तो मन बहुत उत्साहित हुआ कि हमारा सपना पूरा हो गया। इसके तुरंत बाद जब इंटरमीडिएट की बच्ची शिखा वर्मा के भी टॉप करने की खबर आई, तो हमारी खुशी दोगुनी हो गई। पूरा स्टाफ और स्कूल का परिवार खुशी से झूम उठा। यह हमारे लिए एक बेहद गौरवान्वित करने वाला पल था, जिसका सपना हम कई साल से देख रहे थे।'

सवाल- क्या इससे पहले भी आपके स्कूल से कोई स्टेट टॉपर रहा है, या फिर यह पहली बार है?

जवाब- उन्होंने बताया, 'यह पहली बार नहीं है। पिछले साल भी यूपी बोर्ड में हमारे स्टूडेंट की थर्ड रैंक थी। उससे पहले भी यूपी में तीसरी, चौथी, पांचवीं, छठी और सातवीं जैसी कई रैंक हमारे स्टूडेंट्स ने हासिल की हैं। 'बाबूराम सावित्री देवी' विद्यालय साल 2014 से चल रहा है। तब से लेकर आज तक बोर्ड परीक्षाओं में ऐसा कोई साल नहीं गया, जब हमारे बच्चे यूपी और जिले की टॉप मेरिट लिस्ट में न आए हों। इस बार नंबर वन पर आने वाले हमारे दोनों बच्चे बहुत प्रतिभाशाली हैं और मैं उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना करता हूं।'

सवाल- क्या स्कूल प्रशासन को पहले से उम्मीद थी कि शिखा और कशिश इस बार उत्तर प्रदेश की मेरिट लिस्ट में जगह बनाएंगी, या यह आपके लिए एक सरप्राइज था?

जवाब- अरुण कुमार वर्मा के मुताबिक, यह हमारे लिए सरप्राइज नहीं था, हमें उनसे पूरी उम्मीद थी। दरअसल, हम अपने स्कूल में 'सुपर 30' नाम से एक स्पेशल क्लास चलाते हैं। इसमें कक्षा 9 में टेस्ट के माध्यम से 30 बच्चों को चुना जाता है। इन चयनित 30 बच्चों को 9वीं से लेकर 12वीं तक पूरी तरह मुफ्त में शिक्षा दी जाती है; यहां तक कि उनकी बोर्ड एग्जाम की फीस भी स्कूल ही वहन करता है। इंटरमीडिएट की यूपी टॉपर शिखा वर्मा और हाईस्कूल टॉपर कशिश वर्मा, दोनों इसी 'सुपर 30' क्लास की छात्राएं हैं। थर्ड रैंक हासिल करने वाली हमारी एक और छात्रा अर्पिता भी इसी बैच से है। शिखा ने तो हाईस्कूल में भी यूपी टॉप-10 में जगह बनाई थी। इन बच्चों की प्रतिभा देखकर हमें अच्छे परिणाम की पहले से ही उम्मीद थी।

सवाल- सीतापुर ने हाल के वर्षों में कई टॉपर दिए हैं। लेकिन आपके स्कूल के इस दोहरे धमाके का क्रेडिट आप किसे देना चाहेंगे?

जवाब- उन्होंने बताया कि इसका पूरा श्रेय मैं विद्यालय परिवार, बच्चों की अथक मेहनत और उनके माता-पिता को देना चाहूंगा। परिवार के सहयोग और आशीर्वाद के बिना कोई भी विद्यालय इतना अच्छा परिणाम नहीं दे सकता है।

सवाल- आपके विद्यालय का ऐसा कौन सा 'टीचिंग मेथड' है, जो स्टूडेंट्स को प्रदेश स्तर पर टॉप करने के लिए तैयार करता है?

जवाब- अरुण कुमार वर्मा के अनुसार, इसमें कोई विशेष रहस्य नहीं है। सबसे अहम बात यह है कि कक्षा में पढ़ाते समय बच्चों का एकाग्रचित होना बहुत जरूरी है। अगर बच्चा ध्यान से सुन और समझ रहा है, तो उसके नाकामयाब होने की गुंजाइश नहीं रहती। इसके अलावा, आजकल स्कूलों में बच्चों को भारी 'होमवर्क' देने की जो परंपरा है, हम उसके बजाय बच्चों में स्वाध्याय यानी Self-learning और तार्किक क्षमता विकसित करने पर जोर देते हैं। कक्षा में ही बच्चों की शंकाओं का शत-प्रतिशत समाधान करते हैं ताकि उन्हें ट्यूशन, कोचिंग या ऑनलाइन क्लासेस पर निर्भर न रहना पड़े।

सवाल- क्या ये छात्राएं पढ़ाई के अलावा Extracurricular Activities में भी हिस्सा लेती थीं?

जवाब- उन्होंने कहा, 'बिल्कुल, पढ़ाई के साथ-साथ Extracurricular Activities में भी बच्चों का इंटरेस्ट रहता है। हमारी छात्रा शिखा वर्मा को डांसिंग और साहित्य में भी काफी रुचि है।'

सवाल- ग्रामीण और छोटे कस्बों के स्कूलों को अक्सर संसाधनों की कमी का सामना करना पड़ता है। क्या आपके स्कूल को भी ऐसी किसी चुनौती का सामना करना पड़ा?

जवाब- अरुण कुमार वर्मा ने बताया कि स्कूल के लेवल पर बच्चों के लिए संसाधनों की कोई कमी नहीं रहती है। चुनौती सिर्फ यह होती है कि कुछ बच्चे पारिवारिक और आर्थिक रूप से काफी कमजोर पृष्ठभूमि से आते हैं। ऐसे प्रतिभाशाली बच्चों को आगे बढ़ाने के लिए ही हमने 'सुपर 30' की शुरुआत की है, ताकि वे बिना किसी आर्थिक बोझ के बेहतर शिक्षा पा सकें।

सवाल- आज के समय में जब कई लोगों ने शिक्षा को व्यापार बना दिया है, ऐसे में आप निशुल्क 'सुपर 30' चला रहे हैं। इसके पीछे की सोच क्या है और इसका मैनेजमेंट आप कैसे करते हैं?

जवाब- अरुण कुमार वर्मा के मुताबिक, आजकल प्राइवेट और कॉन्वेंट स्कूलों में महंगी फीस और ड्रेसेस की एक होड़ सी लगी हुई है। इस होड़ में कई प्रतिभाशाली बच्चे संसाधनों के अभाव में पीछे रह जाते हैं। समाज की इन्हीं प्रतिभाओं को आगे लाने के विचार से हमने 'सुपर 30' शुरू किया। हम इन 30 बच्चों की कक्षाएं 9वीं से 12वीं तक सामान्य बच्चों से अलग चलाते हैं। इसके अलावा, हमारी एक दूसरी संस्था भी है, वहां भी हमने 'सुपर 30' की यह निशुल्क व्यवस्था लागू कर रखी है। वहां के बच्चे भी यूपी टॉप-10 में आए हैं। इस तरह हम दोनों स्कूलों को मिलाकर कुल 240 बच्चों को पूरी तरह मुफ्त में शिक्षा दे रहे हैं।

सवाल- बोर्ड परीक्षा के दौरान बच्चों पर काफी मानसिक दबाव होता है। बच्चों को तनाव मुक्त रखने के लिए आप लोग क्या कदम उठाते हैं?

जवाब- उन्होंने कहा, 'हम पूरे साल बच्चों को Motivate करते रहते हैं। समय-समय पर टेस्ट के माध्यम से उनका मूल्यांकन किया जाता है, जिससे उनके अंदर का परीक्षा का डर खत्म हो जाता है। हम उन्हें समझाते हैं कि परीक्षा का कोई अनावश्यक दबाव नहीं लेना है। इसी तनाव-मुक्त माहौल का नतीजा है कि बच्चे इतना बेहतरीन परिणाम देते हैं।

सवाल- अगले साल यूपी बोर्ड परीक्षा में बैठने वाले लाखों छात्र-छात्राओं के लिए आपका क्या संदेश है?

जवाब- अरुण कुमार वर्मा के मुताबिक, जो बच्चे इस साल पास हुए हैं, उन्हें जीवन में आगे बढ़ने के लिए बहुत-बहुत शुभकामनाएं। जिनका परिणाम मनमुताबिक नहीं रहा, उन्हें निराश होने के बजाय नया लक्ष्य बनाकर आगे बढ़ना चाहिए। जो बच्चे अगले साल बोर्ड परीक्षा देने वाले हैं, उनके लिए मेरा यही संदेश है कि आप चाहे जिस भी स्कूल में पढ़ें, जब शिक्षक पढ़ा रहे हों तो पूरी एकाग्रता के साथ उनकी बात सुनें और समझें। अगर आप ऐसा करते हैं, तो आपको भी शिखर तक पहुंचने से कोई नहीं रोक सकता है।

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